शनिवार, 30 मई 2009

मैं अपने सभी मित्रों के क्षमा चाहता हूँ

मैं अपने सभी मित्रों के क्षमा चाहता हूँबहुत दिन से अपने ब्लॉग पर भी कुछ नही लिखा और ही दोस्तों केविचारों से अवगत हो पाया हूँ... कुछ दिन से पारिवारिक कार्यों और पढ़ाई में इतना उलझा हुआ हूँ की किसी कोसमय नही दे पाया... पर मैं एकाध दिन में ही आपसे रूबरू होता हूँ.... आशा है आप पहले सा ही स्वागत करेंगे....
आपका अपना
लोकेन्द्र

रविवार, 10 मई 2009

माँ क्या होती है ? उससे बेहतर कोई नहीं जानता


माँ क्या होती है ? उसके न होने का दर्द क्या होता है ? शायद यह उससे बेहतर कोई नहीं जानता जिसकी माँ अब उसके साथ न हो। मैंने 25 वर्ष की अपनी उम्र में बहुत कुछ देखा पर किसी की आँखों में माँ के लिए इतनी पीढ़ा कभी नहीं देखी जितनी उसकी आँखों में देखी। उसे जब भी माँ की याद आती है उसकी आँखे भीगे बिना नहीं मानती। आज से ठीक 21 महीने पहले मैंने उसकी आँखों में माँ के लिए प्यार और माँ के न होने की सूनापन देखा था। भरी क्लास में उसकी आँखों से झरते आंसू देख कर मैं अंदर ही अन्दर व्याकुल हो गया फिर सोचा कि चलो इससे बात की जाए। पर मन ही मन डर लग रहा था पता नहीं वो क्या सोचेगी ? वो बहुत सुन्दर है। अक्सर लड़के उससे गलत नियत से दोस्ती करना चाहते हैं तो मैं सोच रहा था कहीं वह मुझे उन लड़कों के जैसा समझ कर बात करने से इंकार न कर दे। करने चले थे कुछ हो गया कुछ सो मैंने बात नहीं की। फिर धीमें - धीमें हम दोनों मैं बात होना शुरू हुई और दोस्ती गहरी हो गई उसने अपने जीवन के बारे मैं बहुत कुछ बताना शुरू किया। तब उसने बताया कि उसकी माँ की मृत्यु कैंसर के कारण हो गयी तब से वो बहुत अकेली पड गयी है। वो जब भी अपनी माँ को याद करती है उसकी आँखो से माँ के लिए असीम प्यार उमडता है, उसके साथ रह कर मैंने जाना किसी लड़की के लिए माँ के क्या मायने हैं। उसने कहा कि आज मैं अपनी माँ के बिना बहुत अकेलापन महसूस करती हूँ। आज भी होली, दीपावली या कोई भी त्यौहार हो उसे उसकी माँ उसकी आंखो मैं आ ही जाती है। एक दिन मैंने उसको समझाया - कि जिस तरह तुम अपनी माँ को याद करती हो और रोती हो तो कभी सोचा है कि तुम्हारी माँ तुम्हें इस तरह रोते देख उस पर क्या बीतती होगी ? जरा सोचो वो अपनी प्यारी बेटी को रोते देखती होगी तो उसे कितना दुख होता होगा। तुम अपनी माँ को खूब याद करो। पर किस तरह ? ये तुम सोच लो या तो उसको दुख पहुंचा कर याद कर लो या फिर उसे इस तरह याद करो कि जब वो ऊपर से तुम्हें देखे तो निश्चिंत हो कर ठंडी आह् भरे। ऐसे काम करो कि उसे तुम पर गर्व हो जाए और वो स्वर्ग में बडे ही ठसक से बोले - देखो वो मेरी बेटी है। और फिर तुम्हें यूं कभी माँ की गोदी में सोने की इच्छा हो तो मेरी माँ के पास आ कर देखना वो भी तुम्हे उसी तरह प्यार देगी। मुझे भी उसकी गोद में और उसके आँचल में सुरक्षित होने का अहसास मिलता है। मैं उसे समझा रहा था क्योंकि मैं उसे रोते नहीं देखना चाहता था, उसे क्या मैं किसी को भी रोते नहीं देख सकता। लेकिन मेरे समझाने से या कुछ सहारा देने से क्या होता ? मैं उसकी माँ की कमीं को तो पूरा नहीं कर सकता था न। मैं क्या कोई भी उसकी माँ की कमी को पूरा नहीं कर सकता। आज मदर्स डे है और वो मेरे साथ नहीं है मैं अकेला अपने कमरे मैं इंटरनेट के सामने बैठा हूँ , सोच रहा हूँ आज वो अपनी माँ को कितना याद कर रही होगी। कहीं वो अकेले किसी कोने मैं बैठ कर रो तो नहीं रही होगी। नहीं नहीं वो अब नहीं रो सकती, मैंने उसको रोने से मना किया है। पर आज कैसे वो अपने आंसू रोक पाएगी। मुझे पता है वो आज नहीं मानेगी जी भर कर अपनी माँ को याद करेगी और उस प्यारी माँ की यादों से अपनी पलकें भिगोयेगी।
मेरा एक दोस्त और है जिसके पास भी माँ का साथ नहीं हैं उसकी की आंखो में भी मैंने अक्सर वही खालीपन देखा जो उसकी आंखों में देखता हूँ। जिस दिन मेरे इस दोस्त ने मुझसे अपना ये दर्द बाँटा तो कसम खा कर कह रहा हूँ, उसकी आंखों में शायद जितने आंसू नहीं होंगे जितने मेरी आंखो में थे, बस फर्क इतना था कि उसके आंसू दिख रहे थे और मेरे अंदर ही अंदर वह रहे थे। क्या करूं दोस्तों को हँसाने के लिए मैंने रोना छोड़ दिया है अगर मैं भी रो दूँ तो फिर सोचता हूँ संभालेगा कौन ? इसलिए मैं रोता हूँ सब से छिप कर रात के अंधेरे में जब मेरी परछाई भी नहीं देख पाती कि मैं रो रहा हूँ।
हे भगवान किसी को भले ही कुछ मत देना पर किसी को माँ के स्नेही आँचल से वंचित मत करना। उसकी असीम ममतामयी प्यार, दुलार, डाँट, सीख और उसका से किसी को महरूम न रखना। हे भगवान तुझे तेरी माँ का वास्ता है।

मदर'स डे

माँ आखिर माँ होती है .... उससे बढ़कर शायद इस दुनिया में कोई भी नही। एक मूक प्राणी के जीवन का पोषण भीमाँ के हाथों में ही होता है। इस कुतिया को ही देख लीजिये ख़ुद कितनी कमजोर शरीर की है लेकिन फ़िर भी अपनेबच्चो को बहुत ही प्रेम के साथ दूध पिला रही है... माँ के इस प्यार ने बरबस ही मुझे अपनी और खींच लिया था... जिसे में अपने मोबाइल के कैमरे में कैद किया बिना नही रह पाया था।

शुक्रवार, 8 मई 2009

कोई तो सुने इनकी पुकार

पाकिस्तान में हो रहा है हिंदुओं पर अत्याचार

पाकिस्तान में रह रहे सिख बंधु बहुत व्याकुल हैं। व्यथित हैं। सो रहें होंगं कभी तो कोई हमारे लिए आवाज उठाएगा। मेरे अपने हिन्दु भाई मेरे लिए हुंकार भरेंगे । कोई सामाजिक - राजनीतिक - धार्मिक संगठन मदद के लिए हाथ बढ़ाएगा। क्योंकि अब तक ऐसा ही होता आया है। अब जब पाक में रह रहे सिखों का जीने के लिए जजिया चुकना पड़ रहा है तो स्वभाविक है उनके मन में इस तरह के ख्यालात आना। पाक में उनकी हालत बहुत दयनीय है जिंदा रहने के लिए उन्हें मुस्लिम संगठनों को लाइफ टेक्स (करोड़ों में) चुकाना पड़ता है इसके बाबजूद भी देश विभाजन के बाद से लगातार पाक में रह रहे हिन्दुओं की संख्या लगातार घट रही है। (आश्चर्य - संख्या वृद्धि के जगह घट रही है। कारण हिन्दुओं पर अत्याचार) पाकिस्तान में हिन्दुओं पर मुस्लिम संगठनों का इतना दबाब रहता है कि उन्हें कुछ भी, कैसे भी करके जजिया चुकाना पड़ता है वरना मुस्लिम अत्याचारी उनकी लड़कियों को उठा ले जाते हैं, मकान - दुकान तोड़ देते हैं, बलात् धर्म परिवर्तित कर देते है यह क्रूर सत्य है।
पर दुर्भाग्य है पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं का जो उनके लिए कोई नारे बुलंद नहीं करता। धर्म निरपेक्षता की बात करने वाले कम्यूनिष्ठ ( कम्यूनिष्ठ - भारत के प्रति कम निष्ठावान), हिन्दुत्व की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी भी ध्यान नहीं देती। कांग्रेस की तो बात ही क्या करें उनके घुटने भी वामपंिथयों की तरह हमेशा मुस्लिम हितों की ओर झुकते हैं। कुछ एक अपराधी प्रवुति के मुस्लिम गुजरात में संर्दिग्ध परिस्थितियों में मारे गए उनके लिए तो सब हो हल्ला मचाते है इन पर हो रहे अत्याचार किसी को नहीं दिख रहे। कांग्रेस के नेता और भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने आस्ट्रेलिया में आंतकवादी गतिविधियों के संदेह में गिरफ्तार मोहम्मद हनीफ की गिरफ्तारी पर कहा था - मुझे रात भर नींद नहीं आई। उन्हीं प्रधानमंत्री को सैंकड़ो मील दूर आंतकवादी गतिविधियो में लिप्त हनीफ की गिरफ्तारी पर नींद नहीं आई वहीं आंख के सामने पाकिस्तान में सिखों पर हो रहे अत्याचार पर आंख, कान और मुँह सब बंद कर रखे है। वे तथाकथित धर्मनिरपेक्षी हिन्दू भी आवाज नहीं उठा रहे जिन्हें अल्पसंख्यकों की बढ़ी चिंता रहती है पाक में सिख की अल्पसंख्यक है जरा ध्यान दो। इस्लाम की सही शिक्षा और सही रूप प्रस्तुत करने वाले
पाक-साफ मुस्लिम संगठन भी खामोश है। जबकि जजिया लेने वाले चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं हम जो कर रहे हैं कुरान शरीफ के हिसाब से कर रहें हैं। ये लोग भी तभी घर से निकलते हैं जब इनके लोगों का नाम आंतकवादी गतिविधियों में फंसता है। तब सब अपने को पाक-साफ साबित करने के आगे आते है। इनके लोगों द्वारा किए जा रहे कामों का ये कभी विरोध करने के लिए एक साथ नहीं खड़े होते।
आपको लग रहा होगा मैं मुस्लिम विरोधी मानसिकता से लिख रहा हूँ पर सत्य यह है कि मैं चाहता हूँ सब बिना भय के साथ-साथ रहें। पर उसके लिए एक-दूसरे के लिए आगे आना पड़ता है भारत में एक समय बगदाद के खलीफा के अधिकार छीने जाने पर महात्मा गांधी ने हिन्दु-मुस्लिम सबके साथ मिलकर आंदोलन चलाया था। तो क्या हम पाकिस्तान में सिखों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
सर्वे भवन्तु सुखिना...........
यही मेरी और मेरे पूर्वजों की सोच है।