रविवार, 10 मई 2009

माँ क्या होती है ? उससे बेहतर कोई नहीं जानता


माँ क्या होती है ? उसके न होने का दर्द क्या होता है ? शायद यह उससे बेहतर कोई नहीं जानता जिसकी माँ अब उसके साथ न हो। मैंने 25 वर्ष की अपनी उम्र में बहुत कुछ देखा पर किसी की आँखों में माँ के लिए इतनी पीढ़ा कभी नहीं देखी जितनी उसकी आँखों में देखी। उसे जब भी माँ की याद आती है उसकी आँखे भीगे बिना नहीं मानती। आज से ठीक 21 महीने पहले मैंने उसकी आँखों में माँ के लिए प्यार और माँ के न होने की सूनापन देखा था। भरी क्लास में उसकी आँखों से झरते आंसू देख कर मैं अंदर ही अन्दर व्याकुल हो गया फिर सोचा कि चलो इससे बात की जाए। पर मन ही मन डर लग रहा था पता नहीं वो क्या सोचेगी ? वो बहुत सुन्दर है। अक्सर लड़के उससे गलत नियत से दोस्ती करना चाहते हैं तो मैं सोच रहा था कहीं वह मुझे उन लड़कों के जैसा समझ कर बात करने से इंकार न कर दे। करने चले थे कुछ हो गया कुछ सो मैंने बात नहीं की। फिर धीमें - धीमें हम दोनों मैं बात होना शुरू हुई और दोस्ती गहरी हो गई उसने अपने जीवन के बारे मैं बहुत कुछ बताना शुरू किया। तब उसने बताया कि उसकी माँ की मृत्यु कैंसर के कारण हो गयी तब से वो बहुत अकेली पड गयी है। वो जब भी अपनी माँ को याद करती है उसकी आँखो से माँ के लिए असीम प्यार उमडता है, उसके साथ रह कर मैंने जाना किसी लड़की के लिए माँ के क्या मायने हैं। उसने कहा कि आज मैं अपनी माँ के बिना बहुत अकेलापन महसूस करती हूँ। आज भी होली, दीपावली या कोई भी त्यौहार हो उसे उसकी माँ उसकी आंखो मैं आ ही जाती है। एक दिन मैंने उसको समझाया - कि जिस तरह तुम अपनी माँ को याद करती हो और रोती हो तो कभी सोचा है कि तुम्हारी माँ तुम्हें इस तरह रोते देख उस पर क्या बीतती होगी ? जरा सोचो वो अपनी प्यारी बेटी को रोते देखती होगी तो उसे कितना दुख होता होगा। तुम अपनी माँ को खूब याद करो। पर किस तरह ? ये तुम सोच लो या तो उसको दुख पहुंचा कर याद कर लो या फिर उसे इस तरह याद करो कि जब वो ऊपर से तुम्हें देखे तो निश्चिंत हो कर ठंडी आह् भरे। ऐसे काम करो कि उसे तुम पर गर्व हो जाए और वो स्वर्ग में बडे ही ठसक से बोले - देखो वो मेरी बेटी है। और फिर तुम्हें यूं कभी माँ की गोदी में सोने की इच्छा हो तो मेरी माँ के पास आ कर देखना वो भी तुम्हे उसी तरह प्यार देगी। मुझे भी उसकी गोद में और उसके आँचल में सुरक्षित होने का अहसास मिलता है। मैं उसे समझा रहा था क्योंकि मैं उसे रोते नहीं देखना चाहता था, उसे क्या मैं किसी को भी रोते नहीं देख सकता। लेकिन मेरे समझाने से या कुछ सहारा देने से क्या होता ? मैं उसकी माँ की कमीं को तो पूरा नहीं कर सकता था न। मैं क्या कोई भी उसकी माँ की कमी को पूरा नहीं कर सकता। आज मदर्स डे है और वो मेरे साथ नहीं है मैं अकेला अपने कमरे मैं इंटरनेट के सामने बैठा हूँ , सोच रहा हूँ आज वो अपनी माँ को कितना याद कर रही होगी। कहीं वो अकेले किसी कोने मैं बैठ कर रो तो नहीं रही होगी। नहीं नहीं वो अब नहीं रो सकती, मैंने उसको रोने से मना किया है। पर आज कैसे वो अपने आंसू रोक पाएगी। मुझे पता है वो आज नहीं मानेगी जी भर कर अपनी माँ को याद करेगी और उस प्यारी माँ की यादों से अपनी पलकें भिगोयेगी।
मेरा एक दोस्त और है जिसके पास भी माँ का साथ नहीं हैं उसकी की आंखो में भी मैंने अक्सर वही खालीपन देखा जो उसकी आंखों में देखता हूँ। जिस दिन मेरे इस दोस्त ने मुझसे अपना ये दर्द बाँटा तो कसम खा कर कह रहा हूँ, उसकी आंखों में शायद जितने आंसू नहीं होंगे जितने मेरी आंखो में थे, बस फर्क इतना था कि उसके आंसू दिख रहे थे और मेरे अंदर ही अंदर वह रहे थे। क्या करूं दोस्तों को हँसाने के लिए मैंने रोना छोड़ दिया है अगर मैं भी रो दूँ तो फिर सोचता हूँ संभालेगा कौन ? इसलिए मैं रोता हूँ सब से छिप कर रात के अंधेरे में जब मेरी परछाई भी नहीं देख पाती कि मैं रो रहा हूँ।
हे भगवान किसी को भले ही कुछ मत देना पर किसी को माँ के स्नेही आँचल से वंचित मत करना। उसकी असीम ममतामयी प्यार, दुलार, डाँट, सीख और उसका से किसी को महरूम न रखना। हे भगवान तुझे तेरी माँ का वास्ता है।

9 टिप्‍पणियां:

Shama ने कहा…

Abhi,abhi "maatru diaws" is sheersah tale apne kuchh sansamar likh ayee hun..
Shayad,mere "lalilekh"aur sansmaran in blogpe ham maa betee, yaa beteke baareme sabse adhik padhna milegaa..
Tamnnaa reh gayee ki, mere koyi aulaad isee pyarse mere liyebhee aisahee kucch sochtee..
Dhanya hai wo maa jiskaa aisa putr hai..
snehsahit
shama

neha ने कहा…

maa....is sabd ke andar saari sristi samai huyi hai......kisi ko yaad to tab kiya jata hai jab use bhul ja sake....khair ye to kahne ki baat hai sach to ye hai ki aap jise bahut pyar karte hain,unhe aap hamesha yaad karte rahte hain....mere blog main aane ke liye dhanyawaad

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहूत ही भावोक लिखा है..........
माँ को खोने का दर्द...........उसके न होने का एहसास ........... शब्द मौन हो गए हैं

www.जीवन के अनुभव ने कहा…

वाह भाई क्या बात है।........
जो पीड़ा और खालीपन तुमने अपने जिन मित्रांे के लिए महशूस किया है। मैं भी अक्सर करती हूँ। और सच कहीं न कहीं मुझे भी ये पीड़ा अन्दर तक भेद जाती है। माँ का प्यार ही सबकुछ नहीं होता माँ की डांट भी बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होती है।

Shikha .. ( शिखा... ) ने कहा…

Mere shabd kho gaye hai.. Bahut hi marmik shabd piroye hai aapne..

bhawna ने कहा…

kya likhoon aapne to jaise mere man ki baat kah di ek ladki ke liye maa ka kya mahatva hota hai yah vahi jaan sakti hai bahut bahut dhanyavaad

आर्यावर्त ने कहा…

ब्लॉग पर कमेन्ट कर उत्साहवर्धन करने के लिए आभार.
दिशा निर्देशित करते रहें.

सादर
आर्यावर्त

Rajat Narula ने कहा…

bahut bhavpurn rachna hai...

adharshila ने कहा…

आपका ब्लॉग देखा अच्छ लगा