सावधान लड़कियो

>> शनिवार, १४ फरवरी २००९


आज है चोरी-छिपे मनाया जाने वाला अनोखा त्यौहार
शीर्षक पढ़कर सोच में पड़ गये क्या ?आज के दिन का लड़के बडी बेसब्री से इंतजार करते हैं। सच मानो मेरे दोस्तों का कहना है कि आज के दिन लडकियाँ बुरा नहीं मानती। अच्छा बताऊँ -मैं कल के दिन अपने काॅलोनी के चैराहे पर खड़ा था। वहाँ वेलेन्टाइन डे की गर्मा गरम चर्चा चल रही थी। अमित जो है लड़कियों से दोस्ती करने के लिए बहुत लालायित रहता है। वह मुझसे कहता है अरे भाई कल तो गल्र्स काॅलेज के सामने खड़ा होऊंगा। सुन्दर सी लडकियों को प्रपोज करूगां। मैने उससे पूछा- क्यों भाई इतनी हिम्मत तुझमें कहाँ से आ गई?इस पर उसने कहा- नहीं रे। कल दिन ही ऐसा है।मैंने कहा- कल के दिन में ऐसा क्या है?उसने कहा- अरे यार तू नहीं समझेगा। कल कोई डर नहीं लगता किसी भी लड़की को कुछ भी बोल दो।मैंने उससे पूछा- तुझे ये सब किसने बताया?उसने कहा- अरे भाई तुम तो खबरों से प्यार करते हो। तब भी नहीं पता। कल प्यार का दिन है। कल कोई भी लड़की बुरा नहीं मानती। और हाँ सैंडल भी नहीं मारती। साथ ही वो गुस्सा भी नहीं करती लड़कियों वाली गाली भी नहीं देती। बस एक यही तो मौका है लड़की को बिना किसी डर के प्रपोज करने का।मैंने कहा - क्या खूब दिन है। अच्छा एक बात और बता कल तू किसे प्रपोज करेगा। वही गीता को जिसे तू रोज देखने जाता है उसके काॅलेज पर।उसने कहा- हाँ, पर वो नहीं मानी तो किसी दूसरी, तीसरी को भी। क्योंकि मैं कल का मौका मिस नहीं करना चाहता। बस कल तो किसी न किसी से प्यार का इजहार करना ही है।मैंने पूछा - पर यार कल तो कई सारे लोग विरोध भी करते हैं और तो और लडके-लडकियों की पिटाई भी कर देते हंै, उनका मुंह भी काला करने से नहीं चूकते।उसने कहा- हाँ, यार वो न तो खुद प्यार करते और न दूसरों को करने देते। मैंने पूछा - यार ये तो तुम झूठ बोल रहे हो। क्या वो तुम्हारे घर में आये क्या विरोध करने। मैंने सुना है वो सिर्फ सड़क, पार्क, होटल और ऐसी ही अन्य एकांत और गुप्त जगहों पर अश्लील हरकतें करने वालों का विरोध करते हैं। किसी के घर विरोध करने नहीं जाते।उसने कहा- तुम्हारा कहना भी सही है। पर भला घर पर इस त्यौहार को कौन मनाता है?मैंने कहा- त्यौहार तो वही है जिसे परिवार के साथ और समाज के साथ मिल कर मनाया जाए।इस पर उसने कहा- इस त्यौहार को घर पर नहीं मना सकते। तुम नहीं समझ सकते। अब मैं चलता हूं, कुछ गुलाब तोड़ लाऊं कल ढेर सारे गुलाबों की जरूरत पडेगी।इतना कह कर वो चला आया। उसके बाद मैं भी अपने घर पर आ गया। पर मैं दिन भर सोचता रहा कल कितनी लड़कियांे को ऐसे ही प्यार करने वाले परेशान करेंगंे। जो ये सोचते हैं कि कल तो किसी भी लड़की को प्रपोज किया जा सकता है। उन लोगों से लड़कियों को भगवान बचाये।
और हाँ, एक बात बार-बार मन को कचोटती है ये ऐसा कैसा त्यौहार है कि जिसे घर पर नहीं मनाया जा सकता। सड़कों, पार्काे पर ही एकांत में मनाया जाता हैं। अगर वाकई इसमें कुछ अच्छाई है तो घर-परिवार और समाज के साथ मनाना चाहिए। पर शायद इतनी हिम्मत तो इस त्यौहार के पेरोकारों के दिलों में भी न हो जो इसे सपरिवार मना सकें।
मैं तो किसी का विरोध नहीं कर रहा न वेलेन्टाइन डें मनाने वालों का और न इसका विरोध करने वालों का। बस लड़ियों ऐसे मनचले लड़कों से सावधान रहना जिन्हें प्यार के आधे प का भी मतलब नहीं पता।

3 टिप्पणियाँ:

media ka falspha १४ फरवरी २००९ १:४३ PM  

अरे वाह भेय्या क्या खूब कही तुमने velentine day की खूब व्याख्या की है . अब एक वेलेंतिने डे चलीसा को भी शीघ्र पोस्ट कर डालो

www.जीवन के अनुभव १४ फरवरी २००९ ८:०४ PM  

bhut khub , par in majnuo ko kaun bataaye ki pyaar ke liye koi din nirdharit nahi kiya jaa sakata.

Shamikh Faraz २१ फरवरी २००९ ८:५० PM  

bahi vah kya khub kahi aapne valantines day par

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